निरस्त वन अधिकार प्रकरणों में आवेदकों को दिया जाएगा सुनवाई का मौका

राज्य स्तरीय निगरानी समिति ने लिया फैसला
मुख्य सचिव ने की बैठक की अध्यक्षता

भोपाल। राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि वन अधिकारों के संबंध में विभिन्न स्तर पर दिये गये आवेदनों की निरस्ती के प्रकरणों में बेदखली के पूर्व आवेदक को अपना पक्ष प्रस्तुत करने और समुचित सुनवाई का एक और अवसर दिया जाये। यह निर्णय आज मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में लिया गया।

समिति ने यह निर्णय इस परिप्रेक्ष्य में लिया है कि निरस्ती के प्रकरणों में आवेदकों को विधियुक्त सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। समिति ने ऐसे प्रकरणों में कार्यवाही 30 जून 2019 तक पूर्ण कर समिति के समक्ष पुन: वस्तु-स्थिति प्रस्तुत करने के निर्देश भी जिला कलेक्टरों को दिये हैं। यह भी तय किया गया है कि निरस्त प्रकरणों के संबंध में समिति के उपरोक्त निर्णय पर की जाने वाली कार्रवाई की नियमित समीक्षा राज्य स्तर से दल भेजकर भी करायी जायेगी। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के अंतर्गत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित है।