पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का और बढ़ेगा कद 

Former MP Jyotiraditya Scindia will grow in stature

सिंधिया के मौजूदा ग्रहयोग बड़ी भूमिका मिलने की तरफ कर रहे इशारा

शिवपुरी। जीवन में ग्रहदशा का प्रभाव हर इंसान की जिंदगी पर पड़ता है। राजा हो या रंक सभी के जीवन मे आने वाले दौर इस बात की पुष्टि करते रहे हैं। इन दिनों ग्वालियर चंबल ही नही, बल्कि देश भर में अपनी अलग पहचान रखने वाले पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ सभी की निगाहें हैं। खासतौर पर तब जबकि समर्थक उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं।

शिवपुरी जिले से पीढ़ियों का नाता रखने वाले सिंधिया राजघराने में जन्मे ज्योतिरादित्य सिंधिया की जन्म कुंडली पर नगर के जाने माने ज्योतिषाचार्य डॉक्टर विकासदीप शर्मा ने नजर डाली है। गूगल पर दी गई सिंधिया की जन्म दिनांक के आधार पर कुंडली का फलित निकाला है। श्री मंशापूर्ण ज्योतिष केंद्र के प्रमुख विकासदीप कहते हैं, कि वर्तमान को देखे तो शनि में राहु अंतर्दशा के प्रभाव से उन्हें ज्यादा परेशानी है, लेकिन वक्री शनिदेव 30 अप्रैल 2019 से 19 सितंबर 2019 को मार्गी होते ही अचानक अप्रत्याशित लाभ प्रदान करेंगे।

सिंधिया की कुंडली में है राजयोग

1 जनवरी 1971 को सुबह 9 बजकर 40 मिनिट पर मुम्बई में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म हुआ था। मकर लग्न में इनकी कुण्डली के दशम भाव में मंगल, तुला राशि में स्थित है। इस भाव में मंगल की स्थिति होने पर लग्न को उच्च देखने के कारण कुल दीपक योग बनता है। सिंधिया का प्रभाव अन्य राजनेताओं की अपेक्षा कहीं अधिक है। ज्योतिरादित्य को जनता भी काफी पंसद करती है, वहीं पार्टी के टॉप लीडर भी पसन्द करते हैं। किसी की भी कुंडली में दशम भाव राजनीति का होता है, वर्तमान ग्रहों की स्थिति देखने के लिए चन्द्र कुण्डली को देखा जाता है।

वर्तमान में शनिदेव अप्रैल 2019 से वक्री होकर 19 सितंबर 2019 तक प्रभावी है। जन्म कुंडली में भी वर्तमान में 2 सितंबर 2018 से 9 जुलाई 2021 तक शनि में राहु अंतर्दशा है। इसमे भी बहुत गहराई से देखा जाए तो 24 जून 2019 से 5 दिसंबर 2019 तक शनि, राहु में शनि की अंतर्दशा ज्यादा खराब है। इसके बाद 5 दिसंबर 2019 से जैसे ही गुरु की प्रत्यंतर दंशा आएगी मान, सम्मान और वैभव दिलाएगी।

कुण्डली में शनि चतुर्थ भाव में स्थित है, जो दशमस्थ मंगल के साथ मिलकर उनकी कुण्डली में अमात्य योग का निर्माण कर रहा है। जन्मपत्रिका में शनि मंगल जहां शुभ सम्बन्ध बना रहे हैं, वहीं लग्न स्थान को देख भी रहे हैं। ग्रहों की इस स्थिति से इन्हें जनता में सम्मान और लोकप्रियता हासिल होने का संकेत मिलता है। सिंधिया की कुण्डली में कई राजयोग हैं। इनकी कुण्डली के बारहवें भाव में सूर्य और बुध की युति है, जो बुधादित्य योग तथा विपरीत राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। तुला राशि में शनि उच्च का होता है, इस राशि में शनि की स्थिति के कारण नीच भंग राजयोग भी बन रहा है।

नवमांश कुण्डली में लग्न वर्गोत्तम है। इसके साथ ही मेष राशि का मंगल रूचक योग बना रहा है और शनि योग का निर्माण कर रहा है। कुण्डली में इन राजयोगों से स्पष्ट है, कि सिंधिया अपने पिता के समान जनाधार प्राप्त करने में सफल हुए और इनका राजनैतिक जीवन सफल रहा है।

कुल मिलाकर आमतौर पर ग्रह जिस भाव को देखते हैं, उस भाव पर शुभ प्रभाव डालते हैं। भाव का स्वामी अगर अपने घर में हो या उसे देखता है, तो उस भाव के फल में वृद्धि होती है और व्यक्ति को इसका लाभ भी मिलता है। सिंधिया की कुण्डली में ग्रहों की स्थिति भी कुछ इसी प्रकार है। इनकी कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल चतुर्थ भाव को देख रहा है। शुक्र जो पंचम भाव का स्वामी है वह पंचम भाव को देख रहा है। छठे भाव का स्वामी भी शुक्र है जो इस भाव पर अपनी दृष्टि डाल रहा है। लग्न के स्वामी शनि और पराक्रम के स्वामी बृहस्पति भी अपने भाव पर शुभ दृष्टि डाल रहे हैं।

इस श्रेष्ठ स्थिति के कारण ज्योतिरादित्य को राजनीति में कामयाबी का सफर तय करना आसन होगा। जनता के बीच इनकी गहरी पैठ होगी। राजनीति में अपने पिता के समान ही उन्हें राजसुख मिलता रहेगा।