लड़ाई से तबाह और फिर आबाद किए इस गांव में सिर्फ रहती हैं महिलाएं, नाम है ‘जिनवार’

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया का देश सीरिया लंबे समय से गृहयुद्ध के कारण तबाही को झेल रहा है। आतंकी संगठन आइएसएस से चल रहे युद्ध और गोलीबारी के कारण यहां कई गांवों की स्थिति ऐसी है, जो पुरुष विहीन हो गए हैं। ऐसे में यहां की महिलाओं के सामने अस्तित्व का संकट सामने आया गया। अलग-अलग समुदाय की महिलाओं ने यहां मिलजुलकर गांवों को आबाद किया। सीरिया का जिनवार ऐसा ही गांव है, जहां सिर्फ महिलाएं रहती है। अपनी मेहनत के बल पर महिलाओं ने इस गांव को आबाद किया है।

गृहयुद्ध में पति की मौत के बाद बदल गई दुनिया
यहां रहने वाली फातिमा अमीन ऐसी ही महिला हैं, जिनके पति सीरिया के युद्ध में बारूदी सुरंग के विस्फोट में आतंकी संगठन आइएसआइएस द्वारा मारे गए। पति के मौत के बाद फातिमा अमीन की दुनिया बदल गई। इसके बाद घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हुई, जिसके कारण बहुत संख्या में महिलाओं को जिनवार में लाकर बसाया गया। इस गांव को बसाने में इन महिलाओं ने बड़ी भूमिका अदा की। यह गांव सीरियाई महिलाओं और उनके बच्चों के लिए एक कठोर परिवारिक संरचना, घरेलू दुर्व्यवहार और गृहयुद्ध की भयावहता से बचने के लिए एक शरणस्थली के रूप में जाना जाता है।

अलग-अलग महिलाओं का समूह रहता है गांव में
कुर्दीश भाषा में जिनवार का मतलब ‘महिलाओं की जमीन’ होता है। इस गांव ने धर्म, जातीयता और राजनीतिक विचारों की परवाह किए बिना सीरियाई महिलाओं और बच्चों का स्वागत किया। यह अपने आप में विविध महिलाओं की एक पच्चीकारी है जो स्वतंत्रता, लोकतंत्र और जीवन के एक नए रूप का अनुभव करना चाहती हैं।

फातिमा ने अरबी भाषा में बताया कि जिनवार हर उस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है जो किसी महिलाओं की स्वतंत्रता के उल्लंघन के बारे में सोचता है या महिला को समाज में कमतर देखता है। यहां ऐसी महिलाएं और बच्चे हैं जो ठीक तरीके से जीवन यापन नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसके विपरीत महिलाएं चाहें तो वे अपना घर बना सकती हैं। यहां हमने न केवल कुर्द महिलाओं के लिए एक गांव बनाया बल्कि हमारे पास अरब महिलाएं भी है, हमारे पास यजीदी भी हैं और हमारे कुछ विदेशी मित्र भी साथ रह रही हैं।

छह बच्चों को साथ रखने के लिए लड़नी पड़ी लड़ाई
अगस्त 2015 में फातिमा अमीन के पति की मौत होने के बाद विधवा होने का कलंक उस पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि 35 वर्षीय को छह बच्चों को साथ रखने के लिए लड़ना पड़ा। उनके पति के परिवार ने उनके बच्चों को बार-बार उनसे दूर किया। वह नहीं चाहती थी कि वह काम करे। अमीन ने परिवार की देखरेख में बेटियों की परवरिश के लिए कोबानी की स्थानीय सरकार में नौकरी करने की मांग की।

उनका कहना है कि वे उसे और उसके बच्चों को कमजोर समझते थे, जबकि उनकी रक्षा के लिए कोई आदमी नहीं बचा था। यहां जिन लोगों के साथ मैं घुल-मिल कर रह रही थी, उन्होंने इस बात को महत्व नहीं दिया और उन्होंने मुझे एक मजबूत या कामकाजी महिला के रूप में स्वीकार नहीं किया या अपने पति की मौत के बाद बच्चों की परवरिश की। अमीन ने कहा कि मैंने (कुर्द) प्रशासन में काम किया और मेरा काम अच्छा और उत्कृष्ट था।

यहां समूह में रहती हैं महिलाएं
जब वह कुर्दिश महिला आंदोलन समूह की मदद से अपने बच्चों को वापस लाने में कामयाब रही तो दो साल पहले कुर्दीश महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्तर पूर्व सीरिया के एक गांव जिनवार चली गईं। यहां हस्तनिर्मित ईंटों से निर्मित भूरे और आयताकार घरों को सूखी और पकी हुई जमीन पर बनाया गया हैं। बाद में घरों को पेंट किया गया और उनको सजाया गया जो उन परिवारों को छू जाते हैं जो उनमें रहते हैं।

आज जिनवार के घरों में 16 महिलाएं और 32 बच्चे रहते हैं। पुरुषों को दिन में यात्रा करने की अनुमति दी जाती है, जब तक वे महिलाओं के प्रति सम्मानपूर्वक व्यवहार करते हैं, लेकिन वे रात भर नहीं रह सकते हैं। शिफ्ट में काम करते हुए महिलाएं जिनवार में आने-जाने वालों पर नजर रखती हैं। रात की सुरक्षा के दौरान वे अपने साथ हथियार भी रखती हैं।