लोकसभा चुनाव में किसानों की कर्जमाफी को बड़ा मुद्दा बनाएगी कांग्रेस

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लोकसभा चुनाव में किसानों की कर्जमाफी को बड़ा मुद्दा बनाएगी कांग्रेस

भोपाल। मप्र में इस बार कांग्रेस को अपनी सरकार बनने की पूरी उम्मीद है। कांग्रेस पहले ही दावा कर चुकी है कि उनके दल की सरकार बनने के बाद पहला फैसला किसानों की कर्ज माफी का किया जाएगा। कांग्रेस ने चुनाव के पहले ही किसानों को लुभाने के लिए दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी की घोषणा कर दी थी। चुनाव परिणाम अगर कांग्रेस के पक्ष में आए तो इसे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

दरअसल प्रदेश में करीब 17 लाख किसान डिफॉल्टर हैं, इनको इसका फायदा होगा। जिससे कांग्रेस को औसतन करीब एक करोड़ लोगों के पार्टी के पक्ष में मतदान करने की उम्मीद है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो कांग्रेस की सरकार में सबसे बड़ा हाथ किसानों का ही माना जाएगा। कांग्रेस का यह दाव सफल रहा तो अगले साल होने लोकसभा चुनाव में कर्जमाफी उसके लिए तुरुप चाल होगी। पार्टी दिल्ली के लिए भी इसी दाव को आजमाने की तैयारी कर रही है। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी। चिदंबरम ने इस मुद्दे पर काम करना शुरू कर दिया है। किसान नेता मानते हैं कि राहत छोटी है, लेकिन किसानों के लिए फायदेमंद है।

मालवा में किसानों ने किया अधिक मतदान
कांग्रेस की सरकार बनती है तो इसमें किसानों की बड़ी भूमिका मानी जाएगी। मंदसौर गोलीकांड से दहले मालवा ने इस बार बंपर वोटिंग की है। रतलाम ग्रामीण में 84.71 फीसदी, रतलाम शहर में 71.71 फीसदी, सैलाना में 88.10 फीसदी, मंदसौर में 78.68 फीसदी, नीमच में 79।10 फीसदी, जावद में 84 फीसदी, मनासा में 84.28 फीसदी, मल्हारगढ़ में 85.85 फीसदी, जावरा में 83.40 और आलोट में 81।97 फीसदी वोटिंग हुई। कांग्रेस को इसी वोटिंग से सरकार बनने की उम्मीद है। कांग्रेस को लगता है कि मंदसौर गोलीकांड से नाराज किसानों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया है।

कर्जमाफी से दिल्ली का सफर होगा पूरा
यदि कांग्रेस को मध्यप्रदेश में सफलता मिलती है तो दिल्ली की सत्ता भी कर्जमाफी के रास्ते पर चलकर तय की जाएगी। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम से इस संबंध में चर्चा भी की है। चिदंबरम भी लोकसभा चुनाव में इसको मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

ये है गणित
85 लाख किसान हैं मध्यप्रदेश में
52 लाख किसान हैं कर्जदार
17 लाख डिफाल्टर हो चुके हैं
12 से 18 हजार करोड़ का अति. भार आएगा