विस चुनाव के नतीजों पर मिशन-19 की तैयारी में भाजपा और कांग्रेस

BJP and Congress in preparation for Mission-19 on the outcome of the election

ये सीटें बढ़ाएंगी भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें, होगा कांटे का मुकाबला

भोपाल। लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। दावे तो दोनों पार्टियों के बड़े-बड़े हैं लेकिन हकीकत ये है कि दोनों ही पार्टियों के लिए 19 के अखाड़े में कई सीटें ऐसी हैं जहां मुश्किल हो सकती है। मप्र में विस चुनाव के घमासान के बाद अब लोकसभा का सियासी संग्राम शुरू हो गया है। इसके लिए दोनों ही प्रमुख पार्टियों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। मप्र में 29 लोकसभा सीटें हैं। दरअसल, दोनों ही पार्टियां मिशन-19 के लिए विस चुनाव के नतीजों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार कर रही हैं।
विस चुनाव के नतीजों को आधार बनाएं तो भाजपा के लिए 9 सीटें जबकि कांग्रेस के लिए एक दर्जन सीटों पर खतरा बरकरार है। हालांकि, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही फिलहाल अपने पत्ते खोलने के लिए तैयार नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के जरिए 15 साल बाद प्रदेश की सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस नई उम्मीद और ऊर्जा के साथ मप्र में लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इधर, भाजपा भी विस हारने के बाद लोकसभा में अपनी साख बचाने के लिए पूरे दम-खम के साथ चुनावी रण में कूदने को तैयार है। यानि, आगामी लोकसभा के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। दोनों ही पार्टियां जीत के बड़े बड़े दावे करती और अपने प्रतिद्वंदी को धूल चटाने के दावे भी करती नजर आने लगी हैं। हालांकि, कुछ सीटें दोनों ही पार्टियों के लिए मुसीबत बनी हुई हैं।
19 की तैयारी में रखा जा रहा है 18 के नतीजों का ध्यान
लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 सीटों के लिए सियासी घमासान होना है। कुछ सीटें भाजपा और कुछ सीटें कांग्रेस के लिए बेहद आसान हैं। लेकिन हालही में हुए विधानसभा चुनाव ने मध्य प्रदेश का राजनीतिक नजरिया बदला है। 19 की तैयारी 18 के नतीजों को ध्यान में रखकर की जाने लगी है। विधान सभा चुनाव के नतीजों को आधार बनाएं तो बीजेपी के लिए 9 सीटें जबकि, कांग्रेस के लिए एक दर्जन सीटों पर खतरा बना हुआ है। इधर, दोनो ही पार्टियां अपने-अपने पत्ते खोलने को भी तैयार नहीं है, जिससे अभी किसी तरह का गणित लगा पाना संभव नहीं है।
ये है कांग्रेस का फीडबैक
हालांकि, टिकट फाइनल करने की दोड़भाग में दोनो ही दल जुटे हुए हैं। इसके लिए कांग्रेस और भाजपा में जमीनी फीडबैक भी लिया जा रहा है। पार्टियों को मिले फीडबैक पर गौर किया जाए तो कांग्रेस इस बार प्रदेश की 12 सीटों पर जीत का भावी अनुमान लगा रही है। साथ ही, कांग्रेस को इस बात की भी उम्मीद है कि, अगर कड़ी मेहनत कर ली जाए तो 5 और सीटें कांग्रेस के कब्जे से छुड़ाई जा सकती हैं। कांग्रेस के अनुमान के अनुसार जिन सीटों पर हालात पार्टी के लिए अनुकूल हैं, उनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, बैतूल, राजगढ़, धार, मंडला, शहडोल, छिंदवाड़ा, गुना, रतलाम, देवास शामिल हैं। इसके अलावा वो सीटें जिनपर जीतना कांग्रेस के लिए काफी चुनौती पूर्ण हैं उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, विदिशा, बालाघाट, खरगौन, रीवा, सीधी, दमोह, सागर, टीकमगढ़, उज्जैन शामिल हैं।
ये है भाजपा का फीडबैक
वहीं, बीजेपी ने भी प्रदेश स्तर पर फीडबैक कराया है, जिसके मुताबिक इस बार उसे कई सीटों पर नुकसान होता नजर आ रहा है। वजह साफ है, प्रदेश की सत्ता अब कांग्रेस के हाथों में है। फीडबैक के अनुसार, भाजपा को उसके काते में 20 सीटें आती दिख रही हैं। जबकि, प्रदेश की बाकि 9 सीटों पर जीत दर्ज कर पाना मुश्किल होगा। जिन सीटों पर पार्टी को भाजपा-कांग्रेस में कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है उनमें छिंदवाड़ा, गुना-शिवपुरी, झाबुआ-रतलाम, धार, खरगौन, मंडला, देवास, बैतूल और राजगढ़ शामिल हैं।
अभी इन सीटों पर है भाजपा-कांग्रेस का कब्जा
आपको बता दें कि, फिलहाल, मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से भाजपा के खाते में 27 सीटें आईं, जबकि 2 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। हालांकि, बाद में एक सीट पर हुए उपचुनाव उपचुनाव में कांग्रेस को एक और सीट की बढ़त मिल गई। इस हिसाब से इस बार प्रदेश की लोकसभा सीटों का गणित 26 और 3 का तय हुआ। फिलहाल अब देखने वाली बात ये होगी कि, क्या भाजपा अपनी मौजूदा सीटों को बचाने में कामयाब रहती है, या विधानसभा की तरह लोकसभा में भी कांग्रेस बाजी मारने में कामयाब होगी।

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