इटली की एक पत्रकार ने किया दावा : बालाकोट एयर स्ट्राइक में मारे गए थे जैश के 170 आतंकी, 45 का इलाज जारी

A Italian journalist claims: 170 terrorists were killed in the Balakot air strikes, 45 treated for 45

नई दिल्ली। इटली की एक पत्रकार ने दावा किया है कि 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के 170 आतंकी मारे गए थे। पत्रकार के मुताबिक, लाख कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना नुकसान की सच्चाई को झुठला नहीं पाई। एक वेबसाइट स्ट्रिंगर एशिया पर प्रकाशित लेख में इटैलियन जर्नलिस्ट फ्रेंसेसा मरीनो ने कहा कि हमले में घायल हुए 45 आतंकियों का इलाज अब भी किया जा रहा है।

पाकिस्तान की कोशिश नाकाम
मरीनो के इस लेख के अनुसार, पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना की कार्रवाई को छुपाने की बहुत कोशिश की। इसके बावजूद वहां मेरे (मरीनो के) सूत्रों ने बताया है कि 26 फरवरी को तड़के जैश के आतंकी कैम्प में क्या हुआ था। एयरस्ट्राइक की जानकारी टुकड़ों में ही सही, लेकिन अब सामने आ रही है। इससे कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल रही है।

6 बजे पहुंची पाकिस्तानी सेना
मरीनो ने लिखा, ‘ये सबको पता है कि भारतीय वायुसेना ने हमला रात 3.30 बजे किया। पाकिस्तानी सेना के सबसे करीबी कैम्प शिनकारी से एक टुकड़ी सुबह 6 बजे वहां पहुंची। शिनकारी बालाकोट से 20 किलोमीटर दूर है। शिनकारी ही पाकिस्तान आर्मी के जूनियर लीडर्स का बेस कैम्प भी है। यूनिट ने वहां पहुंचकर घायलों को हरकत-उल-मुजाहिदीन के कैम्प में पहुंचाया। वहां पाकिस्तान आर्मी के डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि वहां अब भी 45 आतंकियों का इलाज चल रहा है। 20 की इलाज के दौरान मौत हो गई।’

सेना की हिरासत में घायल आतंकी
इटैलियन पत्रकार ने आगे लिखा, ‘जिन आतंकियों का इलाज चल रहा है, वो सभी सेना की हिरासत में हैं। कई हफ्ते के इंतजार और जानकारी जुटाने के बाद अब यह दावा करना बिल्कुल सुरक्षित होगा कि हमले के वक्त ही करीब 130 से 170 जैश आतंकी ढेर हो गए थे। इनमें 11 प्रशिक्षक भी थे। दो ट्रेनर अफगानी थे।’

मारे गए आतंकियों के परिवारों को नकद मुआवजा
मरीनो ने दावा किया है कि हमले के बाद जैश के आतंकी अपने उन साथियों के घर पहुंचे जो इस हमले में मारे गए थे। इनके परिवारों को मुआवजे के तौर पर नकद राशि दी गई। बालाकोट कैम्प के निचले हिस्से में ‘ब्लू पाइन होटल’ है। इसके बगल में अब नया साइन बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है- तालीम-उल-कुरान। पहले यहां जैश के साइन बोर्ड हुआ करते थे। कैम्प पर अब भी सेना का ही कब्जा है। कैप्टन रैंक का एक अधिकारी यहां प्रशासन संभाल रहा है।

पुलिस को भी जाने की इजाजत नहीं
इस लेख के मुताबिक, ‘स्थानीय नागरिक तो क्या लोकल पुलिस भी कैम्प के आसपास तक नहीं जा सकती। पुराने लोगों में से यहां कुछ बच्चे और 4 अध्यापक ही बचे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि क्यों हमले के बाद कैम्प से मलबा निकालकर उसे कुन्हार नदी में फेंका गया। जैश के लोग दावा कर रहे हैं कि वो हमले का बदला जरूर लेंगे।’