8 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्‍या के आरोपित को फांसी की सजा

8-year-old innocent hanged and sentenced to death

ग्वालियर। अपर सत्र न्यायाधीश अशोक शर्मा ने बुधवार को 8 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने वाले आरोपी मनोज प्रजापति को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि आरोपी को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी सांसें बंद न हो जाएं।

फांसी की सजा सुनते ही आरोपी कटघरे में बैठ गया। परिजनों के गले लगकर रोने लगा। अपर सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस आदेश का पालन हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद किया जाए और रिकार्ड को हाईकोर्ट भेजा जाए। 22 महीने में कोर्ट ने मामले की ट्रायल खत्म कर फैसला सुनाया है और जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा है। आरोपी ने घटना को नयागांव में अंजाम दिया था।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि ‘वर्तमान में जिस प्रकार मासूम बच्चियों के साथ निर्दयता पूर्वक बलात्संग कर उनकी निर्मम हत्याओं के अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है कि अपराधियों को कठोर से कठोर दंड दिया जाए। अन्यथा समाज के अंदर ऐसे मामले और होने लगेंगे। इसलिए आरोपी को मृत्यु दंड की सजा सुनाई जाती है। समाज न्यायालय से यही अपेक्षा करता है कि जघन्य व घृतिण अपराधों में अतिकतम दंड दिया जाए”। कोर्ट ने कहा कि मामले में ऐसी कोई परिस्थित नहीं है, जिससे निष्कर्ष निकला जा सके कि अपराधी आगे चलकर पुन: इस तरह के अपराध में लिप्त नहीं होगा। पुनर्स्थापित होकर एक स्वच्छ जीवन जी सकेगा। पुलिस की ओर से पैरवी डीपीओ अब्दुल नसीम व अतिरिक्त डीपीओ मनोज कुमार जैन ने की।

हत्या कर पाटौर में छिपा दिया था शव

पनिहार थाना क्षेत्र स्थित नयागांव में खदान पर मासूम का पिता मजदूरी करता था। कुछ समय से खदान पर काम न मिलने के कारण वह शहर में मजदूरी करने आ गया था। उसके 4 बच्चे थे। उसकी 8 वर्षीय बेटी नयागांव में शासकीय प्राथमिक विद्यालय के कक्षा तीसरी में पढ़ती थी।

4 जुलाई 2017 को सुबह 11 बजे वह घर से स्कूल के लिए निकली थी। वह स्कूल पहुंची भी, लेकिन 4 बजे छुट्टी होने के बाद वह घर नहीं पहुंची। जब मासूम घर नहीं पहुंची तो परिजन ने उसकी तलाश शुरू की। स्कूल में भी कक्षा की बेंच पर उसका बैग और टिफिन रखा मिला। जिस पर स्कूल के स्टाफ ने सोचा कि बच्ची बैग छोड़कर चली गई है। परिजन जब स्कूल तलाशते पहुंचे तो उसके गायब होने का पता लगा।

स्कूल में 4 बजे तक उसे देखे जाने का भी पता लगा। इसके बाद परिजन ने स्कूल और घर के रास्ते पर कई बार तलाश किया। इसके बाद परिजन पनिहार थाने पहंुचे और पुलिक को सूचना दी। बच्ची के इस तरह लापता होने के मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया। बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन देर रात तक उसका कुछ पता नहीं लगा।

पुलिस को लापता होने के 13 घंटे बाद 5 जुलाई 2017 को सुबह 5 बजे स्कूल के पास रामप्रसाद प्रजापति की खाली पड़ी पाटौर के दरवाजे पर मासूम का शव पड़ा होने की सूचना मिली। जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटना स्थल की जांच की। बच्ची के गले पर गला कसने के निशान साफ दिखने से पहली ही नजर में हत्या होना साफ हो गया था। पोस्टमार्टम व जांच के बाद साफ हुआ कि मासूम के साथ दुष्कर्म कर हत्या की गई है।

ऐसे पकड़ा गया था आरोपी

आरोपी मनोज प्रजापति अपने चाचा हरिराम व परिवार के साथ मासूम की तलाश करवा रहा था। तलाशने का उसने पूरा नाटक किया था। अपराध करने के बाद उसको कोई पछतावा भी नहीं दिख रहा था। पुलिस को घटना स्थल से शर्ट का बटन मिला था। जब मामले की जांच चल रही थी तभी आरोपी मनोज प्रजापति की चेहरे पर टीआई ने नाखून का निशान देख लिया। इस आधार पर पुलिस को शक हो गया। उससे पूछताछ की। उसने पूरी घटना पुलिस को बता दी। पुलिस ने हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया।