कुपोषण का कलंक मिटाने शिवराज सरकार 57 हजार करोड़ करेगी खर्च

कुपोषण का कलंक मिटाने शिवराज सरकार 57 हजार करोड़ करेगी खर्च

– राज्य सरकार ने कुपोषण कम करने तैयार किया तीन साल का एक्शन प्लान
भोपाल। चुनाव से पहले कुपोषण के मुद्दे पर विपक्ष के निशाने पर आई प्रदेश की भाजपा सरकार अब पोषण अभियान चलाकर करारा जबाव देने की तैयारी कर रही है। केंद्र की मदद से राज्य सरकार ने कुपोषण को कम करने के लिए तीन साल का एक्शन प्लान तैयार किया है। राज्य सरकार तीन साल के इस पोषण अभियान पर 57 हजार 587 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। प्रदेश में कुपोषण के कारण उत्पन्न समस्याओं, नवजात शिशु और गर्भवती महिलाओं पर राज्य सरकार यह रकम खर्च करने जा रही है। मध्यप्रदेश में पोषण अभियान चलाने को लेकर केंद्र सरकार ने योजना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए पचास फीसदी राशि आईडीबीआई, तीस फीसदी राशि केंद्र और बाकी बीस फीसदी रकम राज्य सरकार खर्च करेगी। राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत सरकार चुनाव से पहले कुपोषण को कम करने का काम करने जा रही है। महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने बताया कि पोषण अभियान की मॉनिटरिंग के लिए पहली बार  सॉफ्टवेयर के जरिए निगरानी की जाएगी। सरकार इसके लिए प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं को स्मार्ट फोन देने जा रही है।
– कुपोषण के मामले में मध्यप्रदेश देश के शिखर पर
कुपोषण के मामले में मध्यप्रदेश देश के शिखर पर है। पोषण अभियान के तहत बच्चों में बढ़ती ठिगनेपन की समस्या को कम किया जा सकेगा। इस अभियान के तहत कम वजन के बच्चों के आंकड़ों में 2 से 6 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही बच्चों में एनीमिया की कमी को 3 से 9 फीसदी कम किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं में एनिमिया को भी कम करने का लक्ष्य है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के पोषण अभियान को चुनावी स्टंट करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा शासन में अब तक कुपोषण से होने वाली मौतों का आंकड़ा सरकार को जनता के सामने पेश करना चाहिए। चुनावी साल में कुपोषण का कलंक मिटाने के लिए तीन साल का प्लान जारी कर राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपाने के साथ ही विपक्ष को भी जवाब देने की तैयारी की है।
– कुपोषण को लेकर लगातार सरकार को घेरता आ रहा  विपक्ष
बता दें कि कुपोषण को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता आ रहा है। बीते दिनों मानसून सत्र में भी विपक्ष ने कुपोषण को लेकर खूब हंगामा किया था। वही इस अभियान को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर शिवराज सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष ने इसे शिवराज का चुनावी स्टंट बताया है। कांग्रेस ने शिवराज सरकार से  भाजपा शासन में अब तक कुपोषण से होने वाली मौतों का सरकार को जनता के सामने आंकड़ा पेश करने को कहा है।उन्होंने कहा है कि भले ही शिवराज सरकार जनता के बीच जाकर इस अभियान के तहत वाहवाही लूट ले लेकिन कांग्रेस खुद जनता को जाकर बताएगी आखिर सच्चाई क्या है।
– खरगोन और सतना जिले में सर्वाधिक अति कम वजन वाले बच्चे
गौरतलब है कि बीते विधानसभा के मानसून सत्र में खुलासा हुआ था कि  प्रदेश में अति कम वजन वाले बच्चों की संख्या 1,26,218 है। यह मार्च 2015 की स्थिति में है। मप्र के खरगोन और सतना जिले में सर्वाधिक अति कम वजन वाले बच्चे पाए गए हैं। इन जिलों में 5399 और 5040 बच्चे अति कम वजन वाले पाए गए हैं। राज्य में कम वजन वाले बच्चों की संख्या 1 लाख से ऊपर पहुंच गई है। खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस के गृह जिले बुरहानपुर में 2329 बच्चे अति कम वजन वाले पाए गए हैं।  राज्य में मार्च 2015 में अति कम वजन वाले बच्चों की संख्या 1,26,218 मार्च 2016 में 90,537 मार्च 2017 में 1,53,842 और मार्च 2018 में 1,03,083 थी।  खरगोन जिले में मार्च 2018 में अति कम वजन वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा थी। छिंदवाडा जिले में अति कम वजन वाले बच्चों की संख्या 2235, बालाघाट जिले में 913, सिवनी जिले में 982 और बैतूल जिले में 1711 थी। यह जानकारी विधानसभा में भाजपा विधायक बाबूलाल गौर के प्रश्न के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने दी थी।
इस अभियान में इन खास बातों पर रखा जाएगा ध्यान
-बच्चों में बढ़ती ठिगनेपन की समस्या।
-बच्चों का लगातार गिरता वजन।
-बच्चों में एनीमिया की कमी।
-गर्भवती महिलाओं में एनिमिया की कमी को कम करना।
-बच्चों का वजन बढ़ाना।
-कुपोपण से उत्पन्न होनी वाली समस्या।

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